जब मैंने पहली बार ज्ञान को पाया एक शांत राह में, जैसे चादनी ने छुआ मेरा रास्ता । हर कहानी में अद्भुत प्रभाव थो, एक अनसुना साहस एक दोस्ती ने मुझे संभाला। मैं प्रेरणा ने सिखाया, जब हारा सुरखाया, कि गिरकर भी, मैं बनूंगा फिर से अक्ष ज्ञान बहरहे क्योकि एक नए भवेरे की चमक मेरे आँसू है। जी हर द्वार में भी हर सीख में हैं, मेरी शाबित मेरी जिदंगी के सपने । राह में कदम सान बनता है। वो दीप, जो जर भूम दोस्ती को आसान बनकर जलता है ।हर बढ़ती है। हर मुश्किल प्रेरणा से हम उशते बनाते है। नए अभिमान ज्ञान वो चाली, जो खोलती
है हर बंद दरवाजा, दोस्ती की हाथ, जो देटी है। हर रोज हर दिल में जलाही, एक उम्मीद का दीप।
नाम = विकास साह
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